Telecom tariffs to rise in 2nd half of this year : Edelweiss…………………

Prices of telecom services are likely to rise in the second half of the current financial year (2019-20), an Edelweiss report said on Tuesday. The probability of a price hike can be attributed to the fact that the penetration in mobile broadband services has increased significantly and is nearing a saturation point. "We estimate telecom operators to raise prices in H2FY20 as mobile broadband subscriber penetration reaches 65 per cent," said the report titled "Telecom-Daylight Again". "Typically, in a market characterised by low penetration of services, providers' quest for market share to gain economies of scale drives down prices, fuelling price wars. However, as investment requirements mount and relative attractiveness of balance market wanes, weaker players consolidate and participants start favouring pricing over incremental market share." On Reliance Jio, the Edelweiss report said that after 10 quarters since its launch and achieving 30 per cent of the revenue market share (RMS), "it is important to pause and take stock where the company stands now versus its objectives". "We believe that after achieving one of its key goals -- 400mn subscribers in H2FY20 -- RJIO will hike prices to improve return ratios," it said, adding that, JIO's management, during its launch, had stated that one of its target is to achieve 400 million subscribers. Regarding Bharti Airtel, the report observed that with a strong balance sheet and adequate network investments, it is well placed to capitalise on industry recovery. On the merged entity of Vodafone Idea, it said: "Although Vodafone Idea has higher operating and financial leverage from India's telecom industry revival, we maintain our cautious stance considering underwhelming capacity expansion plans and weak data volume traction. "We continue to believe that RJIO will become India's largest telecom operator led by the network's high data capacity driving mobile broadband subscriber market share."

Status of VRS and revival proposal of BSNL……

It has came to notice that some quarry has been raised by DOT on VRS proposal . As a result, case was not put up in yesterday Cabinet meeting . Some leftist retirees leaders are start misguiding and spreading rumour about VRS . These Associations sabotage the revival of BSNL which is detrimental to future of all 1.75 lacs employees .Beware from them.Members should resign from these Associations.

Jio’s fibre business raising Rs 27,000-crore loan Funds……..

: Reliance Jio Infocomm’s fibre network unit is raising about Rs 27,000 crore in syndicated loans from a group of banks, three executives aware of the financing plans told ET, as the newly created infrastructure business expands to meet expected demand for its assets from sectors such as power besides telecom and internet services providers. Lenders in the consortium include ICICI Bank, Axis Bank, State Bank of India (SBI) and Punjab National Bank, said industry executives dealing with the fund-raising.: SBI is said to be advancing Rs 10,000-11,000 crore. ICICI Bank and Punjab National Bank have offered Rs 5,000 crore each. Axis Bank has committed Rs 6,000 crore.

TOABSNL (BMS) is pursuing for improvement in VRS package…………

TOABSNL (BMS) is pursuing for improvement in VRS package i.e. either VRS scheme after implementation of 3rd PRC or additional increments for leftover service or ex-gratia should be treated as retirement benefits so that no income tax on VRS package . However 3rd PRC shall be implemented immediately after VRS process. So, Pension will be revised accordingly even with 15% benefits after success of VRS. So there is no loss of Pension revision . However GOI recommending additional ex-gratia of 5% in lieu of PRC.

BSNL के 54 हजार कर्मचारी ले सकेंगे लाभ, VRS को कैबिनेट की मंजूरी जल्द

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने भी वीआरएस स्कीम लाने के लिए सरकार को मंजूरी दी है। दूरसंचार विभाग ने कैबिनेट के पास प्रस्ताव भेजा है। चुनाव आयोग ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। बता दें कि मंजूरी मिलने के बाद कंपनियां बॉन्ड के जरिए वीआरएस की रकम जुटा सकेंगी

बीएसएनएल घाटे में क्यों चला गया…..

आइये जानते हैं मोदी सरकार बी एस एन एल की बर्बादी के लिये कितनी जिम्मेदार है सबसे पहला सवाल - अगर 2014 में मोदी सरकार की जगह कांग्रेस सरकार आती तो क्या होता कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल का अगर आंकलन करें तो 2005 में बी एस एन एल के रिज़र्व प्लस सरप्लस 50.5 हजार करोड़ से बढ़कर 60.27 हजार करोड़ हुआ था और 10।हजार करोड़ के लाभ में था मगर 2014 में जब कांग्रेस सरकार गई तब बी एस एन एल 8 हजार करोड़ नुकसान में था और बी एस एन एल का सारा सरप्लस खत्म हो चुका था (2009-10 में पहली बार बी एस एन एल घाटे में गया, जबकि उस समय जिओ का नामो निशान नही था) और इसके पीछे निम्न वजह रही 1. बी एस एन एल को स्पेक्ट्रम की बोली में शामिल न करते हुए शर्त थोपी गई कि बी एस एन एल को सभी सर्कल में स्पेक्ट्रम लेना ही पड़ेगा और वो भी सबसे ज्यादा बोली वाली कीमत पर। इस तरह बी एस एन एल से कुल 18,500 करोड़ छीन लिए। इतना ही नही बी एस एन एल को हर साल दूसरी कम्पनियों से काफी ज्यादा स्पेक्ट्रम चार्ज अदा करना पड़ा। बी एस एन एल को 2006-07 से पहले स्पेक्ट्रम चार्ज नही देना पड़ता था मगर कांग्रेस सरकार ने 2006-07 से उसे भी शुरू कर दिया। 2. 2010 फरवरी में सरकार ने स्पेक्ट्रम चार्जेज 2% बढ़ा दिये, जिसके खिलाफ सभी प्राइवेट कम्पनियां TDSAT में चली गयी और उन्हें बढ़े हुए चार्जेज नही देने पड़े मगर बी एस एन एल को ये फायदा नही दिया गया और उसे बढ़े हुए चार्जेज ही भरने पड़े, इस तरह तकरीबन 700 करोड़ का बोझ बी एस एन एल पर डाला गया 3. किसी भी टेलीकॉम कंपनी के लिये सबसे पहली चीज होती है स्विचिंग कैपेसिटी अप्रैल 12 -2005 में बी एस एन एल के हालत इतने खराब हो चुके थे कि मोबाइल स्विच की कैपेसिटी 84 लाख थी और सब्सक्राइबर 94 लाख, 24 में से 17 सर्कल ओवरलोडेड चल रहे थे। इसके बावजूद काँग्रेस सरकार ने बी एस एन एल की स्विचिंग कैपेसिटी नही बढ़ने दी। पहले 2006 में 4.55 करोड़ लाइन के टेंडर की बात चली जिसे ए राजा ने घटाकर 1.4 करोड़ लाइन कर दिया। 2008 में टेंडर इशू होना था 93 लाख लाइन का, जिसे लटकाते लटकाते ले गए मार्च 2010 तक ओर सैम पित्रोदा (राहुल गांधी के सलाहकार)की अध्यक्षता वाली कमेटी ने टेंडर कैंसिल कर दिया। इस वजह से 2009 में बी एस एन एल का लाभ सिर्फ 575 करोड़ रह गया (2007-08 में 3009 करोड़ था) जबकि रेवेन्यू था 35812 करोड़ जबकि एयरटेल का लाभ बढ़कर 7800 करोड़ हो गया (2007 में 4062 करोड़ था) 4. इतने में कांग्रेस सरकार का मन नही भरा, 20 जनवरी 2010 में कपिल सिब्बल ने रोहतक से एम एन पी सर्विस की शुरुआत की, जिस से बी एस एन एल के सभी बड़े उपभोक्ता प्राइवेट कंपनियों की तरफ भाग गए 2004-2009 कांग्रेस सरकार की उपलब्धि ये रही कि 2009-10 में बी एस एन एल पहली बार नुकसान में गया वो भी 1823 करोड़। साल 2011-12 में बी एस एन एल का नुकसान 8851 करोड़ पहुंच गया मतलब कांग्रेस सरकार में 10 हजार करोड़ कमाने वाली बी एस एन एल 8000 हजार करोड़ नुकसान वाली बना दी गई और जिसके सरप्लस 40 हजार करोड़ भी कांग्रेस सरकार डकार गई (2014-15 में मोदी सरकार में बी एस एन एल की सर्विसेज से इनकम 4.16% बढ़ी जो कि पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा थी) 5. करप्शन-- कांग्रेस राज में संचार मंत्री ए राजा ने इतनी लूट मचाई कि अगस्त 2011 में उनकी सरकार होते हुए भी सी बी आई को बी एस एन एल वाई मैक्स घोटाले में उनके खिलाफ इंक्वायरी बैठानी पड़ी और मारन जी ने तो करोड़ो की एक्सचेंज को सन टी वी के लिये घर मे ही लगवा लिया था 6. बी एस एन एल गांवो में दूरसंचार सेवा देने वाली एकमात्र कम्पनी थी इसके बावजुद 1 अप्रैल 2008 से एक्सेस डेफिसिट चार्ज खत्म कर दिया जिस से बी एस एन एल को हर साल 2000 करोड़ का नुकसान पहुंचा 7. 2005 में बी एस एन एल का मार्किट शेयर सबसे ज्यादा था (मोबाइल में एयरटेल का 10.98 ओर बी एस एन एल का 9.9% यानी सिर्फ 1% का फर्क) 2007 में बी एस एन एल का टोटल मार्किट शेयर था 31.44% जो कि सितम्बर 2014 तक आते आते 10.91% रह गया। क्या कोई कांग्रेस सरकार से वजह नही पूछना चाहेगा कि उसने प्राइवेट कंपनियों को इतना फायदा क्यों पहुंचाया 8. मोदी सरकार बी एस एन एल में वी आर एस लाने की बात कर रही है तो कांग्रेस इतना हल्ला मचा रही। कांग्रेस शायद भूल गयी कि सबसे पहले सैम पित्रोदा समिति ने मार्च 2010 में बी एस एन एल स्टाफ को एक तिहाई करने का प्रस्ताव दिया था इतना ही नही प्रस्ताव यह भी था कि बी एस एन एल की सारी जमीन को बेचने के लिये अलग से कम्पनी बनाई जाए इन सब तथ्यों पर गौर फरमाएं तो ये तो स्पष्ट है कि बी एस एन एल की इस हालत के लिये सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है औऱ वामपंथी यूनियन मोदी सरकार को कोस रही हैं जिनके समय में बी एस एन एल का मार्किट शेयर 8.65% से बढ़कर 10.45% हो गया (अक्तूबर 2018 में सिर्फ जिओ और बी एस एन एल के कनेक्शन ही पॉजिटिव थे) चुनाव सिर पर होते हुये भी मोदी सरकार में फरवरी की सैलरी समय पर नही मिली (कांग्रेस होती तो चुनाव के समय तो कम से कम सैलरी पक्का समय पर आती)। मतलब वो वोट की राजनीति नही करते पर लोग इस बात पर मोदी सरकार को कोस रहे हैं तो क्या ये सही होता की कर्मचारियों को धोखा देने के लिये फरवरी मार्च अप्रैल की सैलरी समय पर मिल जाती और जून की सैलरी का कोई भरोसा नही होता इसलिए सभी कर्मचारी भाइयों से निवेदन है कि वामपंथी यूनियनों के बहकावे में न आकर अपना दिमाग लगाएं और देश की प्रगति में अपना योगदान दे। जय हिंद

Quit from the Associations and unions ,who are opposing VRS. These leftist retiree leaders in in fear of reduction in monthly subscription. Only option left with members ,stopped monthly subscription. Why these retirees are in panic about VRS. These leaders are not worked during service but start caring about survival of BSNL after retirement. They continously enjoying on subscription money .

As per DOT estimate, average VRS package for executives between age 50-55 years will get 40 lacs to 60 lacs however non executives will get 20 lacs to 40 lacs .